प्रदोष व्रत हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है, जब सूर्यास्त के समय भगवान शिव सबसे अधिक प्रसन्न होते हैं। यह व्रत भोलेनाथ की कृपा पाने, पापों से मुक्ति और मनोकामनाएं पूरी करने का सरल उपाय है। आप प्रदोष काल में शिव-पार्वती की पूजा करके स्वास्थ्य, समृद्धि और शांति प्राप्त कर सकते हैं। विशेष रूप से सोम, शनि या गुरु प्रदोष का महत्व और बढ़ जाता है। यदि आप जानना चाहते हैं कि प्रदोष व्रत कब है, तो स्थानीय पंचांग देखें या नियमित रखें – यह व्रत जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है।
प्रदोष व्रत क्या है?
आप यदि भगवान शिव की भक्ति में रुचि रखते हैं, तो प्रदोष व्रत आपके लिए एक विशेष अवसर हो सकता है। यह व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है, चाहे वह शुक्ल पक्ष हो या कृष्ण पक्ष। प्रदोष व्रत 2026 list में कुल 25 व्रत पड़ रहे हैं, जो आपके जीवन में शांति और समृद्धि ला सकते हैं। इस व्रत से जुड़ी परंपराएं सदियों पुरानी हैं। आप इसे रखकर अपने पापों का नाश कर सकते हैं और शिव जी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। कभी-कभी यह सोम प्रदोष या शनि प्रदोष के रूप में विशेष महत्व रखता है। यदि आप 2026 में इन व्रतों का पालन करना चाहते हैं, तो स्थानीय पंचांग जरूर देखें, क्योंकि तिथियां क्षेत्र के अनुसार थोड़ी भिन्न हो सकती हैं।
प्रदोष काल सूर्यास्त के समय शुरू होता है, जब आप पूजा कर सकते हैं। यह व्रत न केवल आध्यात्मिक बल्कि शारीरिक लाभ भी देता है। आप सोच रहे होंगे कि क्यों रखें यह व्रत? क्योंकि यह सरल है, फिर भी प्रभावशाली। छोटे-छोटे नियमों का पालन करके आप बड़े फल प्राप्त कर सकते हैं।
प्रदोष व्रत का महत्व और इतिहास
प्रदोष व्रत का महत्व शिव पुराण में वर्णित है, जहां इसे पाप नाशक बताया गया है। आप इस व्रत से अपने जीवन के दोषों से मुक्ति पा सकते हैं। इतिहास की बात करें, तो समुद्र मंथन की कथा से जुड़ा है यह व्रत। देवताओं और असुरों के मंथन से निकले विष को शिव जी ने ग्रहण किया, और प्रदोष काल में उनकी पूजा से चंद्र देव को मुक्ति मिली। विभिन्न ग्रंथों में यह उल्लेख है कि प्रदोष तिथि पर शिव और पार्वती का मिलन होता है।
आप जानते होंगे कि सोम प्रदोष सोमवार को पड़ता है, जो चंद्र से जुड़ा है। वहीं शनि प्रदोष शनिवार को, जो कर्म बाधाओं को दूर करता है। 2026 में दो शनि प्रदोष विशेष हैं, जो आपके लिए ग्रह दोष निवारण का अवसर लाएंगे। भौम प्रदोष मंगलवार को पड़ता है, जो स्वास्थ्य लाभ देता है। इस व्रत का इतिहास पुराणों से लिया गया है, जहां इसे मोक्ष प्राप्ति का साधन माना गया। आप इसे रखकर परिवार की खुशहाली सुनिश्चित कर सकते हैं। कभी लंबी कथाएं सुनाई जाती हैं, कभी छोटी। लेकिन महत्व हमेशा बड़ा रहता है।
विशेष प्रकारों में गुरु प्रदोष बृहस्पतिवार को, जो ज्ञान बढ़ाता है। 2026 की लिस्ट में ऐसे कई व्रत हैं। आप इनका लाभ उठाकर जीवन को बेहतर बना सकते हैं।
प्रदोष व्रत 2026 सूची: पूर्ण तिथियां और समय
आप 2026 में प्रदोष व्रत रखने की योजना बना रहे हैं, तो यहां pradosh vrat 2026 list दी गई है। यह जानकारी विभिन्न पंचांगों से ली गई है, जैसे तिथियां, दिन, पक्ष और प्रकार। पूजा का समय आमतौर पर सूर्यास्त से 45 मिनट पहले शुरू होता है, लेकिन स्थानीय समय देखें। कुल 25 व्रत हैं, जिसमें सोम, शनि जैसे विशेष शामिल हैं।
| महीना | तारीख | दिन | पक्ष | प्रकार | पूजा समय (लगभग) |
|---|---|---|---|---|---|
| जनवरी | 1 जनवरी 2026 | गुरुवार | शुक्ल | गुरु प्रदोष | शाम 5:00 से 7:00 |
| जनवरी | 16 जनवरी 2026 | शुक्रवार | कृष्ण | शुक्र प्रदोष | शाम 5:10 से 7:10 |
| जनवरी | 30 जनवरी 2026 | शुक्रवार | शुक्ल | शुक्र प्रदोष | शाम 5:20 से 7:20 |
| फरवरी | 14 फरवरी 2026 | शनिवार | कृष्ण | शनि प्रदोष | शाम 5:30 से 7:30 |
| फरवरी | 28 फरवरी 2026 | शनिवार | शुक्ल | शनि प्रदोष | शाम 5:40 से 7:40 |
| मार्च | 16 मार्च 2026 | सोमवार | कृष्ण | सोम प्रदोष | शाम 5:50 से 7:50 |
| मार्च | 30 मार्च 2026 | सोमवार | शुक्ल | सोम प्रदोष | शाम 6:00 से 8:00 |
| अप्रैल | 15 अप्रैल 2026 | बुधवार | कृष्ण | बुध प्रदोष | शाम 6:10 से 8:10 |
| अप्रैल | 29 अप्रैल 2026 | बुधवार | शुक्ल | बुध प्रदोष | शाम 6:20 से 8:20 |
| मई | 14 मई 2026 | गुरुवार | कृष्ण | गुरु प्रदोष | शाम 6:30 से 8:30 |
| मई | 29 मई 2026 | शुक्रवार | शुक्ल | शुक्र प्रदोष | शाम 6:40 से 8:40 |
| जून | 13 जून 2026 | शनिवार | कृष्ण | शनि प्रदोष | शाम 6:50 से 8:50 |
| जून | 27 जून 2026 | शनिवार | शुक्ल | शनि प्रदोष | शाम 7:00 से 9:00 |
| जुलाई | 12 जुलाई 2026 | रविवार | कृष्ण | रवि प्रदोष | शाम 7:10 से 9:10 |
| जुलाई | 27 जुलाई 2026 | सोमवार | शुक्ल | सोम प्रदोष | शाम 7:20 से 9:20 |
| अगस्त | 11 अगस्त 2026 | मंगलवार | कृष्ण | भौम प्रदोष | शाम 7:30 से 9:30 |
| अगस्त | 25 अगस्त 2026 | मंगलवार | शुक्ल | भौम प्रदोष | शाम 7:40 से 9:40 |
| सितंबर | 10 सितंबर 2026 | गुरुवार | कृष्ण | गुरु प्रदोष | शाम 6:50 से 8:50 |
| सितंबर | 24 सितंबर 2026 | गुरुवार | शुक्ल | गुरु प्रदोष | शाम 6:40 से 8:40 |
| अक्टूबर | 9 अक्टूबर 2026 | शुक्रवार | कृष्ण | शुक्र प्रदोष | शाम 6:30 से 8:30 |
| अक्टूबर | 24 अक्टूबर 2026 | शनिवार | शुक्ल | शनि प्रदोष | शाम 6:20 से 8:20 |
| नवंबर | 8 नवंबर 2026 | रविवार | कृष्ण | रवि प्रदोष | शाम 6:10 से 8:10 |
| नवंबर | 22 नवंबर 2026 | रविवार | शुक्ल | रवि प्रदोष | शाम 6:00 से 8:00 |
| दिसंबर | 7 दिसंबर 2026 | सोमवार | कृष्ण | सोम प्रदोष | शाम 5:50 से 7:50 |
| दिसंबर | 21 दिसंबर 2026 | सोमवार | शुक्ल | सोम प्रदोष | शाम 5:40 से 7:40 |
Note: यह list विभिन्न स्रोतों से क्रॉस-चेक की गई है। कभी-कभी तिथियां एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं। आप अपने क्षेत्र के अनुसार जांचें।
जनवरी 2026 प्रदोष व्रत
जनवरी में तीन व्रत हैं। पहला 1 जनवरी को गुरु प्रदोष, जो ज्ञान बढ़ाने वाला है। आप सुबह से उपवास रखें। दूसरा 16 जनवरी शुक्र प्रदोष, वैवाहिक सुख के लिए। तीसरा 30 जनवरी फिर शुक्र प्रदोष। इनमें पूजा शाम को करें।
फरवरी से दिसंबर 2026 प्रदोष व्रत
फरवरी में दो शनि प्रदोष, 14 और 28 को। मार्च में सोम प्रदोष विशेष। अप्रैल बुध प्रदोष। मई गुरु और शुक्र। जून शनि। जुलाई रवि और सोम। अगस्त भौम। सितंबर गुरु। अक्टूबर शुक्र और शनि। नवंबर रवि। दिसंबर सोम। आप महीने-दर-महीने प्लान करें।
प्रदोष व्रत कैसे रखें: नियम और विधि
आप प्रदोष व्रत रखना चाहते हैं, तो नियम सरल हैं। सुबह स्नान करके संकल्प लें। उपवास निर्जला या फलाहार रख सकते हैं। शाम को प्रदोष काल में पूजा करें। सामग्री: बिल्व पत्र, चंदन, फल, धूप, दीप, दूध।
पूजा विधि शुरू स्नान से। सफेद वस्त्र पहनें। शिव लिंग पर अभिषेक करें, “ओम नमः शिवाय” जपें। आरती गाएं। पार्वती जी को भी पूजें। व्रत खोलने से पहले कथा सुनें। यदि आप अकेले हैं, तो पढ़ सकते हैं। बच्चे भी रख सकते हैं, लेकिन हल्का।
नियम: मांस, लहसुन, प्याज न खाएं। क्रोध से दूर रहें। दान करें। यह विधि पुराणों से ली गई है। आप इसे अपनाकर लाभ पाएं।
प्रदोष व्रत के लाभ
यह व्रत रखकर आप आध्यात्मिक शांति पाते हैं। पाप नाश होता है, मोक्ष की प्राप्ति। व्यावहारिक रूप से स्वास्थ्य बेहतर, समृद्धि बढ़ती। वैवाहिक सुख मिलता, ग्रह दोष दूर। शनि प्रदोष से कर्म बाधा हटती।
आपके लिए विशेष: यदि स्वास्थ्य समस्या है, सोम प्रदोष रखें। धन के लिए गुरु प्रदोष। परिवार की खुशी बढ़ती। लंबे समय तक रखने से चमत्कार होते। छोटे लाभ भी बड़े लगते।
प्रदोष व्रत कथा
एक कथा है समुद्र मंथन की। विष से चंद्र देव प्रभावित, शिव जी ने बचाया। आप इसे पढ़कर व्रत पूरा करें। दूसरी कथा: एक ब्राह्मण ने रखा, धन प्राप्त किया।
कथा सुनने से फल दोगुना। आप परिवार संग सुनें। पुराणों में कई कथाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (F.A.Q)
प्रदोष व्रत कब रखा जाता है?
आप इसे हर महीने की त्रयोदशी पर रख सकते हैं, शाम को पूजा के साथ।
2026 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
कुल 25, जैसा pradosh vrat 2026 list में।
प्रदोष व्रत में क्या खा सकते हैं?
फल, दूध, लेकिन निर्जला बेहतर।
महिलाएं प्रदोष व्रत कैसे रखें?
आप संकल्प लेकर, पूजा करके। विशेष लाभ संतान के लिए।
प्रदोष व्रत का फल क्या है?
पाप नाश, स्वास्थ्य, धन।
क्या बच्चे रख सकते हैं?
हां, लेकिन हल्का।
विशेष प्रदोष क्या हैं?
सोम, शनि आदि।
समापन
आपने प्रदोष व्रत 2026 list देखी, महत्व जाना। अब रखें और लाभ पाएं। शिव जी की भक्ति से जीवन सुंदर बने। मंदिर जाएं, पंचांग देखें।






