हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले पंचांग देखना एक पुरानी और महत्वपूर्ण परंपरा रही है। पंचांग के माध्यम से हमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण जैसी महत्वपूर्ण जानकारियाँ मिलती हैं, जिनके आधार पर पूजा-पाठ, विवाह, गृह प्रवेश, यात्रा आदि के लिए शुभ समय तय किया जाता है। अगर आप जानना चाहते हैं कि कल का पंचांग क्या कहता है, तो इस लेख में आपको पूरी और सटीक जानकारी मिलेगी।
कल का पंचांग तिथि – मुख्य जानकारी
नीचे दी गई तालिका में कल के पंचांग की संपूर्ण जानकारी दी गई है, जिसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण और अन्य आवश्यक विवरण शामिल हैं:
- दिनांक: 2 जुलाई 2026
- वार: गुरुवार
- माह (अमावस्यांत): ज्येष्ठ
- माह (पूर्णिमांत): आषाढ़
- ऋतु: वर्षा ऋतु
- अयन: दक्षिणायन
- पक्ष: कृष्ण पक्ष
- तिथि: द्वितीया तिथि (सुबह लगभग 09:37 बजे तक), इसके बाद तृतीया तिथि
- नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा नक्षत्र (सुबह लगभग 09:26 बजे तक), इसके बाद श्रवण नक्षत्र
- योग: वैधृति योग (शाम लगभग 04:38 बजे तक), इसके बाद विष्कुंभ योग
- करण: गरज करण (सुबह 09:37 तक) उसके बाद वणिज करण
- चंद्र राशि: धनु राशि (दोपहर लगभग 01:31 बजे तक), इसके बाद मकर राशि
- चंद्र राशि: मकर राशि
- सूर्योदय: सुबह लगभग 05:38 बजे
- सूर्यास्त: शाम लगभग 07:24 बजे
- विक्रम संवत: 2083
- शक संवत: 1948
पंचांग क्या होता है?
पंचांग शब्द संस्कृत के “पंच” और “अंग” से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है पाँच अंग। हिंदू पंचांग पूरी तरह चंद्रमा की गति पर आधारित होता है, यानी इसमें दिन, महीने और तिथियों की गणना चंद्रमा की विभिन्न कलाओं को देखकर की जाती है। हिंदू कैलेंडर में हर नए दिन की शुरुआत सूर्योदय से मानी जाती है, न कि आधी रात से, जैसा कि अंग्रेजी कैलेंडर में होता है।
पंचांग के पाँच मुख्य अंग इस प्रकार हैं:
- तिथि
- वार
- नक्षत्र
- योग
- करण
इन्हीं पाँच घटकों के संयोजन से प्रतिदिन का पंचांग तैयार होता है, जिसके आधार पर शुभ-अशुभ समय और मुहूर्त निकाले जाते हैं।
तिथि (Tithi)
तिथि चंद्रमा की स्थिति के अनुसार निर्धारित होती है और यह दिन के किसी भी समय शुरू हो सकती है। एक तिथि की अवधि लगभग 19 से 26 घंटे के बीच बदलती रहती है। जैसे ही चंद्रमा अपनी स्थिति बदलता है, तिथि भी बदल जाती है। चंद्र मास में कुल 30 तिथियाँ होती हैं:
- अमावस्या, पूर्णिमा, प्रथमा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी
वार (Vaar)
सप्ताह के सातों दिनों को वार कहा जाता है, और प्रत्येक वार का स्वामी एक ग्रह होता है:
- सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार, रविवार
नक्षत्र (Nakshatra)
आकाश में चंद्रमा के मार्ग को 27 भागों में बाँटा गया है, जिनमें से प्रत्येक भाग को एक नक्षत्र कहा जाता है। चंद्रमा जिस नक्षत्र में स्थित होता है, वही उस दिन का प्रमुख नक्षत्र माना जाता है। 27 नक्षत्रों के नाम क्रमशः इस प्रकार हैं:
- अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशीर्ष, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती
योग (Yoga)
योग सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त स्थिति से तय होता है। पंचांग में कुल 27 योग बताए गए हैं, जो इस प्रकार हैं:
- विष्कुम्भ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगंड, सुकर्मा, धृति, शूल, गंड, वृद्धि, ध्रुव, व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यतीपात, वरीयान, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्मा, इन्द्र, वैधृति
करण (Karan)
एक तिथि के दो बराबर भागों को करण कहा जाता है, यानी एक दिन में दो करण होते हैं। कुल 11 करण होते हैं, जिनमें से 7 चर करण और 4 स्थिर करण होते हैं:
- किंस्तुघ्न, बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि (भद्रा), शकुनि, चतुष्पाद, नाग
राशि क्या होती है?
सूर्य का मार्ग 30-30 अंश के बारह बराबर भागों में बँटा होता है, और इन्हीं भागों को राशि कहा जाता है। कुल 12 राशियाँ होती हैं:
- मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ, मीन
सूर्य जब किसी विशेष राशि में प्रवेश करता है तो उसी के अनुसार चंद्र मास का नाम भी निर्धारित होता है। उदाहरण के लिए, सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करते ही चैत्र मास शुरू होता है, और वृषभ राशि में प्रवेश के साथ वैशाख मास आरंभ होता है।
पक्ष (Paksha)
चंद्रमा की घटती-बढ़ती कलाओं के आधार पर महीने को दो पक्षों में बाँटा जाता है:
- कृष्ण पक्ष: इस दौरान चंद्रमा का आकार धीरे-धीरे घटता जाता है, यानी पूर्णिमा से अमावस्या तक की अवधि।
- शुक्ल पक्ष: इस दौरान चंद्रमा का आकार बढ़ता जाता है, यानी अमावस्या से पूर्णिमा तक की अवधि।
हिंदू कैलेंडर के बारह महीने
हिंदू पंचांग में साल को बारह महीनों में बाँटा गया है:
- चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ, फाल्गुन
पंचांग देखना क्यों ज़रूरी है?
पंचांग केवल धार्मिक अनुष्ठानों के लिए ही नहीं, बल्कि दैनिक जीवन के लिए भी उपयोगी है। इसके माध्यम से शुभ मुहूर्त, राहु काल, ग्रहों की स्थिति और त्योहारों की सही तारीखें पता चलती हैं। चाहे विवाह की तिथि तय करनी हो, गृह प्रवेश का मुहूर्त निकालना हो, या नया व्यापार शुरू करना हो, पंचांग देखकर ही शुभ समय का चयन किया जाता है।
निष्कर्ष
कल का पंचांग जानने से आप अपने दिन की शुरुआत सही जानकारी के साथ कर सकते हैं और किसी भी शुभ कार्य के लिए सही समय का चुनाव कर सकते हैं। तिथि, नक्षत्र, योग, करण और राहु काल जैसी जानकारियाँ रोज़ बदलती रहती हैं, इसलिए हर दिन का अद्यतन पंचांग देखना लाभदायक रहता है। उम्मीद है इस लेख से आपको कल का पंचांग से जुड़ी सभी ज़रूरी जानकारियाँ एक ही जगह मिल गई होंगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
कल कौन सी तिथि है?
कल की तिथि पंचांग के अनुसार चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करती है और हर दिन बदलती रहती है। सटीक जानकारी के लिए अपने शहर के हिसाब से पंचांग ज़रूर देखें, क्योंकि तिथि दिन के किसी भी समय बदल सकती है।
राहुकाल में क्या नहीं करना चाहिए?
राहुकाल के दौरान नई शुरुआत, जैसे शादी, गृह प्रवेश, यात्रा या कोई महत्वपूर्ण लेन-देन करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि रोज़मर्रा के सामान्य काम इस दौरान किए जा सकते हैं।
तिथि और नक्षत्र हर दिन क्यों बदलते हैं?
चंद्रमा लगातार गति करता रहता है, इसलिए उसकी स्थिति के अनुसार तिथि और नक्षत्र भी बदलते रहते हैं। यही कारण है कि एक तिथि कभी 19 घंटे की होती है तो कभी 26 घंटे की।
अभिजीत मुहूर्त क्या होता है?
अभिजीत मुहूर्त दिन के बीचोंबीच का समय होता है, जो दोपहर के आसपास लगभग 48 मिनट का होता है। इसे दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है, खासकर जब कोई और मुहूर्त उपलब्ध न हो।
पंचांग के पाँच अंग कौन-कौन से हैं?
पंचांग के पाँच अंग हैं — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। इन्हीं पाँचों को मिलाकर किसी भी दिन का शुभ-अशुभ समय तय किया जाता है।
क्या पंचांग हर शहर के लिए अलग होता है?
हाँ, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय हर शहर में अलग होने की वजह से राहुकाल, मुहूर्त और तिथि के समय में थोड़ा बहुत अंतर आ सकता है। इसलिए हमेशा अपने शहर के हिसाब से ही पंचांग देखना सही रहता है।






