नवरात्रि में जब घंटियाँ बजती हैं और अगरबत्ती की सुगंध चारों तरफ फैलती है, तो मन अपने आप इस आरती की तरफ खिंच जाता है। अम्बे तू है जगदम्बे काली (anuradha paudwal ambe tu hai jagdambe kali lyrics)– ये शब्द जैसे ही कानों में पड़ते हैं, दिल में एक अजीब सी शांति उतर आती है। तुमने कभी महसूस किया है कि जब यह आरती गूंजती है, तो सारी थकान, सारा तनाव एक पल में गायब हो जाता है? यही इस आरती की ताकत है। माँ दुर्गा का यह सबसे प्रिय भजन है, जो जगरातों में भी गूंजता है और घर की छोटी-सी पूजा में भी। आज हम तुम्हें इसके पूरे बोल, अर्थ और उस भावना से रूबरू करवाएंगे जो इसे इतना खास बनाती है।
Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Lyrics | अंबे तू है जगदंबे काली आरती लिखी हुई

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
तेरे भक्त जनो पर,
भीर पडी है भारी माँ ।
दानव दल पर टूट पडो,
माँ करके सिंह सवारी ।
सौ-सौ सिंहो से बलशाली,
अष्ट भुजाओ वाली,
दुष्टो को पलमे संहारती ।
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
माँ बेटे का है इस जग मे,
बडा ही निर्मल नाता ।
पूत – कपूत सुने है पर न,
माता सुनी कुमाता ॥
सब पे करूणा दरसाने वाली,
अमृत बरसाने वाली,
दुखियो के दुखडे निवारती ।
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
नही मांगते धन और दौलत,
न चांदी न सोना माँ ।
हम तो मांगे माँ तेरे मन मे,
इक छोटा सा कोना ॥
सबकी बिगडी बनाने वाली,
लाज बचाने वाली,
सतियो के सत को सवांरती ।
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
Anuradha Paudwal Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Lyrics Audio
—– Addition —-
चरण शरण मे खडे तुम्हारी,
ले पूजा की थाली ।
वरद हस्त सर पर रख दो,
मॉ सकंट हरने वाली ।
मॉ भर दो भक्ति रस प्याली,
अष्ट भुजाओ वाली,
भक्तो के कारज तू ही सारती ।
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
हिंदू धर्म में इस आरती का महत्व
नवरात्रि में यह आरती नहीं गाई तो पूजा अधूरी लगती है। खासकर सप्तमी, अष्टमी और नवमी को। जगरातों में तो यह आरती रात भर गूंजती रहती है। माँ कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री – हर रूप को यह आरती छूती है।
शुक्रवार का दिन माँ दुर्गा का होता है। उस दिन यह आरती गाओ तो घर में सुख-शांति अपने आप आती है। लोग कहते हैं कि नियमित रूप से यह आरती गाने से दरिद्रता दूर होती है, संकट कटते हैं और माँ की कृपा सदा बनी रहती है।
यह सिर्फ भजन नहीं, माँ और भक्त के बीच का सीधा संवाद है। जैसे बेटा माँ से कह रहा हो – मेरे ऊपर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है, अब तुम ही संभालो। और माँ चुपचाप सिंह पर सवार होकर आती हैं।
आरती कैसे गाएं और कब गाएं
सुबह स्नान करके, साफ कपड़े पहनकर, माँ की मूर्ति या फोटो के सामने थाली सजाओ। दीपक, अगरबत्ती, फूल, कुमकुम। घंटी बजाओ। पूरी श्रद्धा से गाओ। धीरे-धीरे भी गा सकते हो, जोर-जोर से भी। माँ को भाव चाहिए, सुर नहीं।
सबसे अच्छा समय – सुबह और शाम की पूजा में। नवरात्रि में तो हर दिन। अगर कोई बड़ी मनोकामना है तो 21 या 51 दिन लगातार गाओ। माँ जरूर सुनती हैं।
लोकप्रिय संस्करण और गायक
नरेंद्र चंचल का वर्जन सुनो तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उनकी आवाज में जैसे माँ खुद उतर आती हों। जगरातों में आज भी उनका यही वर्जन सबसे ज्यादा गूंजता है।
अनुराधा पौडवाल का वर्जन बहुत मधुर है। घर की पूजा के लिए एकदम परफेक्ट। उनकी आवाज में मिठास है, माँ से बात करने जैसा लगता है।
गुलशन कुमार का पुराना वर्जन भी बहुत प्रिय है। और अब तो कई नए सिंगर्स भी इसे गा रहे हैं, पर पुराने वर्जन की बात ही अलग है।
F.A.Q (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
प्रश्न 1. अम्बे तू है जगदम्बे काली आरती किस देवी को समर्पित है?
मुख्य रूप से माँ दुर्गा के काली स्वरूप को, लेकिन इसमें माँ के सारे रूप समाहित हैं – काली, दुर्गा, अम्बे, जगदम्बे।
प्रश्न 2. इस आरती को गाने के क्या लाभ हैं?
संकट दूर होते हैं, मन को शांति मिलती है, माँ की विशेष कृपा प्राप्त होती है, घर में सुख-समृद्धि आती है।
प्रश्न 3. क्या इस आरती का अंग्रेजी अनुवाद उपलब्ध है?
हाँ, ऊपर दिया गया है। हर लाइन का अर्थ समझकर गाओ तो भक्ति दोगुनी हो जाती है।
प्रश्न 4. नवरात्रि में इसे कब गाना चाहिए?
हर दिन गाओ, लेकिन सप्तमी, अष्टमी, नवमी को विशेष रूप से। शाम की आरती में जरूर।
प्रश्न 5. क्या इसमें कोई विशेष नियम हैं?
बस सच्चा भाव होना चाहिए। बाकी माँ सब स्वीकार करती हैं।
समापन
अब जब भी मन घबराए, जब भी लगे कि चारों तरफ अंधेरा छा गया है, बस एक बार यह आरती शुरू कर देना। देखना, माँ सिंह पर सवार होकर आती हुई दिखेंगी।
जय अम्बे। जय जगदम्बे। जय काली माँ।
तुम भी रोज गाओ। माँ तुम्हें कभी अकेला नहीं छोड़ेगी। जय माता दी।






