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Anuradha Paudwal Jai Ganesh Deva Lyrics: Full Hindi Aarti & Meaning

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आपने कभी महसूस किया है कि गणेश जी की पूजा में आरती कितनी महत्वपूर्ण होती है? यह न सिर्फ मन को शांति देती है, बल्कि जीवन की बाधाओं को दूर करने का माध्यम भी बनती है। आज हम बात करेंगे अनुराधा पौडवाल द्वारा गाई गई “जय गणेश देवा” आरती के बारे में। यह आरती भक्ति गीतों की दुनिया में एक विशेष स्थान रखती है। आप अगर अनुराधा पौडवाल जय गणेश देवा लिरिक्स खोज रहे हैं, तो यहां आपको पूर्ण बोल, अर्थ और उपयोग की पूरी जानकारी मिलेगी। गणेश चतुर्थी हो या कोई अन्य त्योहार, यह आरती हर मौके पर गूंजती है।

विघ्नहर्ता गणपति की यह आरती सुनकर आपका मन आनंद से भर जाएगा। अनुराधा पौडवाल की मधुर आवाज इसमें जान डाल देती है। क्या आप जानते हैं कि यह आरती पारंपरिक रूप से कैसे विकसित हुई? चलिए, आगे बढ़ते हैं और इसकी गहराई समझते हैं। यह न केवल धार्मिक है, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत भी। आप इसे रोजाना गाकर अपने दिन की शुरुआत कर सकते हैं।

अनुराधा पौडवाल: एक प्रसिद्ध भक्ति गायिका

आप अनुराधा पौडवाल को भक्ति संगीत की रानी के रूप में जानते होंगे। उनका जन्म 27 अक्टूबर 1954 को करवार में हुआ था। शुरुआत में उन्होंने प्लेबैक सिंगिंग की, लेकिन बाद में भक्ति गीतों की ओर रुख किया। उन्होंने हजारों भजन गाए हैं, जिनमें शिव, दुर्गा और गणेश से जुड़े गीत प्रमुख हैं। उनके करियर में फिल्मफेयर अवॉर्ड्स की झड़ी लगी, चार बार बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का खिताब जीता। पद्म श्री से सम्मानित अनुराधा ने गुलशन कुमार के साथ मिलकर भक्ति संगीत को नई ऊंचाइयां दीं।

उनके भक्ति गीतों का योगदान अपार है। गणेश आरतियों में “जय गणेश देवा” उनका क्लासिक संस्करण है। आप इसे सुनें तो लगता है जैसे गणपति बप्पा खुद सामने हैं। अनुराधा की आवाज में गहराई है, जो श्रोताओं को भावुक कर देती है। उन्होंने 9,000 से ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए, विभिन्न भाषाओं में। भक्ति संगीत में उनका योगदान युवाओं को भी आकर्षित करता है। क्या आपने उनके अन्य गीत सुने हैं? वे जीवन को सकारात्मक बनाते हैं।

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अनुराधा पौडवाल ने सामाजिक कार्य भी किए। सूर्योदय फाउंडेशन के माध्यम से वे मदद पहुंचाती हैं। राजनीति में भी कदम रखा, भाजपा जॉइन की। लेकिन उनकी पहचान हमेशा भक्ति गायिका की रही। गणेश भजन उनके करियर का अहम हिस्सा हैं। आप उनके गीतों से प्रेरणा ले सकते हैं।

जय गणेश देवा आरती का इतिहास और महत्व

आरती की उत्पत्ति

आप जानते हैं कि “जय गणेश देवा” आरती की जड़ें प्राचीन हिंदू परंपराओं में हैं। यह पारंपरिक रूप से गणेश जी की पूजा में गाई जाती है। गणेश जी को प्रथम पूज्य देव माना जाता है क्योंकि वे विघ्नहर्ता हैं। बुद्धि, समृद्धि और सफलता के दाता। आरती का इतिहास वेदों और पुराणों से जुड़ा है। शिव-पार्वती के पुत्र गणेश की कथाओं में इसकी झलक मिलती है। विभिन्न क्षेत्रों में थोड़े बदलाव के साथ इसे गाया जाता है।

यह आरती सरल है, लेकिन गहन। आप इसे गाकर महसूस करेंगे कि कैसे यह मन को केंद्रित करती है। उत्पत्ति के बारे में कहा जाता है कि यह मध्यकालीन भक्ति आंदोलन से प्रेरित है। संतों ने इसे लोकप्रिय बनाया। गणेश महोत्सव में इसका विशेष स्थान है।

धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ

आरती गाने से क्या फायदे मिलते हैं, आप सोच रहे होंगे? सबसे पहले, बाधाएं दूर होती हैं। सफलता मिलती है। शांति आती है। संकष्टी चतुर्थी और गणेश चतुर्थी जैसे त्योहारों पर इसे गाना शुभ माना जाता है। गणेश जी की कृपा से जीवन सुगम हो जाता है। आध्यात्मिक रूप से, यह ध्यान बढ़ाती है। मन को एकाग्र करती है।

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आप रोजाना इसे गाएं तो तनाव कम होगा। परिवार के साथ गाना बंधन मजबूत करता है। धार्मिक लाभ में पुण्य प्राप्ति शामिल है। गणपति बप्पा की आरती से सकारात्मक ऊर्जा फैलती है। विभिन्न त्योहारों में इसका उपयोग बढ़ता है। क्या आपने कभी महसूस किया कि आरती के बाद मन कितना हल्का हो जाता है? यही इसका जादू है।

Anuradha Paudwal Jai Ganesh Deva Lyrics

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

एकदंत, दयावंत, चार भुजाधारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥

पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥

अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥

सुर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

बिनन की लाज राखो, शंभू सुत वारी।
कामना को पूरा करो, जग बलिहारी॥

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

आरती कैसे गाएं: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

आरती गाना आसान है। सबसे पहले पूजा की तैयारी करें। घंटी, अगरबत्ती, दीपक और फल-मिठाई रखें। सुबह या शाम का समय चुनें। अनुराधा पौडवाल के संस्करण में संगीत मधुर है। धुन धीमी और भावपूर्ण। शुरू करें “जय गणेश” से।

स्टेप 1: गणेश जी की मूर्ति सामने रखें। स्टेप 2: दीप जलाएं। स्टेप 3: आरती की थाली घुमाएं। स्टेप 4: बोल गाएं, परिवार को शामिल करें। टिप: उच्चारण साफ रखें। छोटे बच्चे भी सीख सकते हैं। अनुराधा की धुन में गाएं तो मजा दोगुना।

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आप इसे धीरे-धीरे गाएं। भावना महत्वपूर्ण है। पूजा के बाद प्रसाद बांटें। यह तरीका सरल है। प्रभावी भी।

संबंधित सामग्री: वीडियो, ऑडियो और अन्य आरतियां

आप अनुराधा पौडवाल के “जय गणेश देवा” को यूट्यूब पर सुन सकते हैं। एक वीडियो में 287 मिलियन व्यूज हैं। हिंदी और अंग्रेजी लिरिक्स के साथ। ऑडियो स्पॉटिफाई पर उपलब्ध है। गाना ऐप पर भी।

अन्य लोकप्रिय गणेश आरतियां हैं “सुखकर्ता दुखहर्ता” और “शेंदूर लाल चढ़ायो”। अनुराधा ने इन्हें भी गाया है। आप इन्हें ट्राई करें। भक्ति बढ़ेगी। वीडियो में दृश्य मनमोहक होते हैं। गणेश जी की मूर्तियां, फूल, आदि।

ये सामग्री ऑनलाइन आसानी से मिलती है। आप प्लेलिस्ट बनाएं। रोजाना सुनें।

F.A.Q

प्रश्न 1: अनुराधा पौडवाल जय गणेश देवा लिरिक्स कहां से डाउनलोड करें?

आप विभिन्न म्यूजिक ऐप्स से डाउनलोड कर सकते हैं। बोल ऑनलाइन उपलब्ध हैं।

प्रश्न 2: इस आरती को कब गाना चाहिए?

गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी या रोजाना पूजा में।

प्रश्न 3: गणेश जी की आरती के क्या फायदे हैं?

बाधाएं दूर होती हैं। बुद्धि बढ़ती है। शांति मिलती है।

प्रश्न 4: लिरिक्स में वेरिएशंस क्यों हैं?

क्षेत्रीय परंपराओं के कारण। मूल भाव एक है।

प्रश्न 5: अनुराधा पौडवाल के अन्य भक्ति गीत कौन से हैं?

“ओम जय जगदीश हरे”, शिव अमृतवाणी, आदि।

समापन (Wrapping Up)

इस लेख में हमने अनुराधा पौडवाल जय गणेश देवा लिरिक्स, महत्व और गाने के तरीके पर चर्चा की। आरती के बोल, अर्थ और इतिहास समझे। आप इसे अपनाकर गणेश जी की कृपा पा सकते हैं। जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे। अब आप भी इस आरती को गाकर देखें। अपना अनुभव साझा करें। अन्य भक्ति लेख पढ़ें। गणपति बप्पा मोरया!