आपने कभी सोचा है कि एक साधारण गांव का लड़का कैसे लाखों दिलों में भक्ति की ज्योति जला सकता है? प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज (premanand govind sharan), वृंदावन के रसिक संत, आज दुनिया भर में राधा कृष्ण भक्ति के प्रतीक बने हुए हैं। उनका जीवन संघर्ष और समर्पण की मिसाल है। आप उनके प्रवचनों से जुड़कर महसूस करेंगे कि आध्यात्मिक मार्ग कितना सरल हो सकता है।
वृंदावन धाम में बसे इस महान संत की लोकप्रियता सोशल मीडिया पर छाई हुई है। यूट्यूब पर उनके सत्संग लाखों दर्शकों को आकर्षित करते हैं। आप भी अगर राधा कृष्ण की लीला में रमना चाहते हैं, तो उनके दर्शन से शुरुआत कीजिए। उनकी शिक्षाएं सखी भाव और सहचरी भाव पर आधारित हैं, जो भक्ति को गहरा बनाती हैं। प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज का प्रभाव इतना गहरा है कि बॉलीवुड सितारे भी उनके पास मार्गदर्शन लेने आते हैं।
क्या आप जानते हैं कि उनकी यात्रा कानपुर के एक छोटे से गांव से शुरू हुई? आज वे वृंदावन संत के रूप में जाने जाते हैं। इस लेख में आप उनके जीवन, शिक्षाओं और योगदान को करीब से जानेंगे। चलिए, इस आध्यात्मिक सफर पर साथ चलते हैं।
प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज का प्रारंभिक जीवन और परिवार
जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि
प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में अखरी गांव में हुआ। आप कल्पना कीजिए, 30 मार्च 1969 को एक सात्विक ब्राह्मण परिवार में उनका अवतरण। उनका मूल नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। पिता शंभू पांडे और माता रामा देवी दोनों ही भक्ति भाव से जीते थे। परिवार कृषि पर निर्भर था, लेकिन आध्यात्मिकता उनकी रगों में थी।
आप सोचिए, ऐसे घर में जहां दादाजी और पिता दोनों संन्यासी बन चुके थे। बड़े भाई संस्कृत के विद्वान थे, जो भागवत पाठ करते। बचपन से ही घर में चालीसा और प्रार्थनाओं का माहौल था। यह वातावरण ने उन्हें भक्ति की ओर खींचा। प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज का परिवार सादगी का उदाहरण था। गरीबी थी, लेकिन भगवान का नाम हमेशा जुबान पर।
कानपुर के सरसौल गांव के निकट यह जन्म हुआ, जहां हर त्योहार भक्ति से मनाया जाता। आप अगर उनके जीवन को देखें, तो समझ आएगा कि पारिवारिक संस्कार कितने महत्वपूर्ण होते हैं। आज भी वे अपने जड़ों को याद करते हैं।
प्रारंभिक आध्यात्मिक रुचि
स्कूल जाते समय प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज गीता प्रेस की किताबें पढ़ते। आप जानते हैं, बचपन में ही सांसारिक सुखों की क्षणभंगुरता पर वे चिंतन करते। जीवन का उद्देश्य क्या है? यह सवाल उन्हें बैचेन करता। घर में बड़े भाई का प्रभाव गहरा था, जो उन्हें भगवत गीता सिखाते।
13 साल की उम्र में उन्होंने घर त्याग दिया। सोचिए, इतनी छोटी आयु में संन्यास की ओर कदम। आप अगर उनके प्रवचनों में सुनें, तो पता चलेगा कि यह फैसला कितना दृढ़ था। स्कूली शिक्षा के दौरान ही आध्यात्मिक किताबें उनकी साथी बनीं। ब्रह्मचर्य का महत्व वे तभी समझ गए।
यह रुचि उन्हें वाराणसी ले गई। आप महसूस करेंगे कि उनका बचपन साधना की नींव था। हरि कथा और संत संगति ने उन्हें आकार दिया। आज आप उनके दर्शन से वैसी ही प्रेरणा ले सकते हैं।
प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज की आध्यात्मिक यात्रा
संन्यास ग्रहण और प्रारंभिक साधना
प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज ने नाम बदला – आनंदस्वरूप ब्रह्मचारी से स्वामी आनंदाश्रम तक। आप कल्पना कीजिए, वाराणसी में गंगा तट पर ध्यान। दिन में तीन बार स्नान, उपवास और आकाशवृत्ति पर जीवन। कठोर तपस्या। मौसम की मार सहते हुए साधना।
भूख और ठंड से जूझते हुए भी वे डटे रहे। आप सोचिए, इतनी कठिनाइयां सहकर भी भक्ति नहीं छोड़ी। वाराणसी में शिव भक्ति से शुरुआत हुई। रास लीला का प्रभाव उन्हें वृंदावन खींच लाया। यह यात्रा सच्चे संन्यास की मिसाल है।
उनकी साधना ने उन्हें मजबूत बनाया। आप उनके जीवन से सीखें कि तपस्या बिना आध्यात्मिक उन्नति नहीं। ब्रह्मचर्य का पालन कड़ाई से किया।
वृंदावन की ओर प्रेरणा
एक संत ने उन्हें रास लीला के लिए आमंत्रित किया। आप जानते हैं, चैतन्य महाप्रभु की लीला ने प्रभावित किया। वृंदावन पहुंचकर बांके बिहारी और राधा वल्लभ मंदिर के दर्शन। हरिवंश चिंतन ने उन्हें बांधा।
राधा वल्लभ संप्रदाय में शरणागत मंत्र मिला। गुरु गौरांगी शरण जी महाराज से सहचरी भाव और नित्य विहार रस की दीक्षा। आप अगर रसोपासना जानना चाहें, तो यह दीक्षा महत्वपूर्ण है। वृंदावन धाम ने उन्हें नया जीवन दिया।
यह प्रेरणा उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट थी। आप महसूस करेंगे कि राधा कृष्ण भक्ति कितनी गहन है।
गुरु सेवा और वृंदावन निवास
गुरु के साथ 10 साल सेवा की। आप सोचिए, विनम्रता से हर कार्य। मधुकरी जीवन अपनाया, ब्रजवासियों का सम्मान किया। दिव्य प्रेम का अनुभव।
वृंदावन में रहकर सत्संग शुरू किया। आप उनके आश्रम में जाकर देखें, कितना शांत माहौल। गुरु सेवा ने उन्हें परिपक्व बनाया। आज वे लाखों को मार्ग दिखाते हैं।
यह निवास उन्हें रसिक संत बनाया। आप भी गुरु की भूमिका समझें।
प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज की शिक्षाएं और दर्शन
भक्ति और रसोपासना का महत्व
प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज सखी भाव पर जोर देते हैं। आप राधा कृष्ण की सेवा में पूर्ण समर्पण करें। सहचरी भाव से भक्ति गहराती है। गुरु की भूमिका आवश्यक है। वे कहते हैं, गुरु से आध्यात्मिक शक्ति मिलती है।
ब्रह्मचर्य का संरक्षण स्वस्थ जीवन के लिए जरूरी। आप अगर तृप्ति चाहते हैं, तो नाम जप करें। रसोपासना में डूबें। यह दर्शन सरल है, लेकिन गहन।
उनकी शिक्षाएं जीवन बदल सकती हैं। आप दूसरों में दोष न देखें, भक्ति क्षीण होती है।
दैनिक जीवन की सलाह
रात 8-10 बजे तक भोजन करें। आप 11 बजे बाद निशाचरी आहार से बचें। नाम जप और सत्संग से धन-सुख मिलेगा। नकारात्मक चरित्र से दूर रहें।
अपमान सहें, मांस-मदिरा त्यागें। आप संतों के निकट रहें। हरि कथा सुनें, संकट मुक्त होंगे। यह सलाह व्यावहारिक है।
पूर्ण समर्पण से प्रिया प्रियतम में आश्रय लें। आप वृंदावन धाम की शरण लें।
सामाजिक और आध्यात्मिक संदेश
राक्षसी भाव त्यागें। आप दूसरों का बुरा न सोचें। भक्ति में नाम जप सर्वश्रेष्ठ। गुरु कृपा से सब संभव।
कलियुग में भक्ति सर्वोत्तम। आप नई पीढ़ी को सिखाएं। उनके संदेश समाज को जोड़ते हैं।
यह दर्शन आपको शांति देगा। आप लागू करके देखें।
प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के योगदान और कार्य
आश्रम और ट्रस्ट
श्री हित राधा केली कुंज ट्रस्ट 2016 में स्थापित। आप जानते हैं, तीर्थयात्रियों को आवास, भोजन, चिकित्सा मिलती है। वृंदावन परिक्रमा मार्ग पर स्थित।
दैनिक कार्यक्रम: मंगल आरती, एकांतिक वार्तालाप, शाम सत्संग, व्याहुला महोत्सव। आप अगर जाएं, तो दिव्य अनुभव होगा। ट्रस्ट भक्ति प्रसार करता है।
यह योगदान लाखों को लाभ पहुंचाता है। आप दान करके जुड़ें।
प्रकाशन और मीडिया
पुस्तकें जैसे ‘ब्रह्मचर्य – कब, क्यों और कैसे?’, ‘365 दिव्य सूत्र’, ‘स्पिरिचुअल अवेकनिंग’। हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी में उपलब्ध। आप पढ़कर जीवन बदलें।
यूट्यूब पर भजन मार्ग चैनल, 16 मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर। इंस्टाग्राम रील्स, फ्लिकर पर दर्शन। प्रवचन: एकांतिक वार्तालाप, भक्त चरित्र, रासोपासना वाणी।
यह मीडिया लाखों तक पहुंचता है। आप सब्सक्राइब करें।
भक्तों पर प्रभाव
लाखों अनुयायी वृंदावन आते। आप उनके सत्संग से प्रेरित होंगे। रसोपासना और नित्य विहार में मार्गदर्शन।
उनका प्रभाव ग्लोबल है। आप भी जुड़कर लाभ लें। बॉलीवुड से लेकर आमजन तक।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज का असली नाम क्या है?
उनका मूल नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे है।
वे वृंदावन कब और क्यों आए?
13 साल की उम्र में संन्यास लेने के बाद, रास लीला की प्रेरणा से वृंदावन आए।
उनकी मुख्य शिक्षाएं क्या हैं?
भक्ति, नाम जप, ब्रह्मचर्य, सखी भाव और पूर्ण समर्पण।
श्री हित राधा केली कुंज आश्रम में क्या गतिविधियां होती हैं?
मंगल आरती, सत्संग, एकांतिक वार्तालाप और तीर्थयात्रियों की सेवा।
उनके प्रवचनों को कहां देखा जा सकता है?
यूट्यूब पर भजन मार्ग चैनल और इंस्टाग्राम पर।
ब्रह्मचर्य का महत्व क्या है, उनके अनुसार?
यह आध्यात्मिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए मूलभूत है, सुखी जीवन की कुंजी।
समापन
प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज (premanand govind sharan) के जीवन से आप सीखें कि भक्ति में समर्पण कितनी शक्ति देता है। उनके मार्ग पर चलकर आध्यात्मिक शांति पाएं। क्या आप तैयार हैं इस सफर के लिए?
वृंदावन धाम की शरण लें। नाम जप जारी रखें। राधा कृष्ण की लीला में रमें। आपका जीवन बदल जाएगा। जय श्री राधे!






