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Anuradha Paudwal Sankat Nashan Ganesh Stotram Lyrics in Hindi with Meaning

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anuradha paudwal sankat nashan ganesh stotram lyrics

जिंदगी में कभी-कभी ऐसा लगता है कि हर तरफ से मुश्किलें घेर लेती हैं। नौकरी में रुकावट, घरेलू कलह, आर्थिक तंगी या फिर कोई अचानक स्वास्थ्य समस्या। इन संकटों से निकलने का सबसे आसान और प्रभावी रास्ता है भगवान गणेश की शरण में जाना। और जब बात गणेश जी के स्तोत्र की हो, तो अनुराधा पौडवाल संकट नाशन गणेश स्तोत्रम लिरिक्स लाखों भक्तों के लिए खास जगह रखता है।

अनुराधा पौडवाल की मीठी और भक्तिमय आवाज में यह स्तोत्र सुनकर मन को अजीब सी शांति मिलती है। नारद पुराण में वर्णित यह संकट नाशन गणेश स्तोत्र विघ्नों को दूर करने, मनोकामनाएं पूरी करने और जीवन में सुख-समृद्धि लाने के लिए जाना जाता है। आप भी अगर रोजाना या त्रिसंध्या में इसे सुनते या पढ़ते हैं, तो धीरे-धीरे आपके रास्ते के कांटे खुद-ब-खुद हटने लगते हैं।

संकट नाशन गणेश स्तोत्र क्या है?

यह स्तोत्र भगवान गणेश के बारह दिव्य नामों का सुंदर वर्णन करता है। मुनि नारद ने इसे पार्वती पुत्र विनायक की महिमा गाते हुए कहा था। संकट यानी कष्ट और नाशन यानी नाश करने वाला – नाम ही इसका असर बता देता है।

आपके दैनिक जीवन में आने वाली छोटी-बड़ी बाधाएं, भय, चिंता या असफलता के डर को यह स्तोत्र शांत करने में मदद करता है। अनुराधा पौडवाल की आवाज में इसे सुनना और भी खास हो जाता है क्योंकि संगीत के साथ भाव जुड़ जाता है। पढ़ने और सुनने में फर्क यह है कि सुनने से भावनात्मक जुड़ाव गहरा होता है, जबकि सही उच्चारण के साथ पढ़ने से मंत्र की शक्ति और बढ़ जाती है।

संकट नाशन गणेश स्तोत्र के 12 नाम और उनका अर्थ

स्तोत्र में गणेश जी के 12 नामों का क्रम दिया गया है। हर नाम उनकी अलग-अलग शक्तियों को दर्शाता है। आइए इन नामों को समझते हैं:

प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम्।
पहला नाम वक्रतुंड – टेढ़े सूंड वाले। दूसरा एकदंत – एक दांत वाले। ये नाम गणेश जी की अनोखी शारीरिक बनावट को याद दिलाते हैं और साथ ही उनकी बुद्धि और विवेक की शक्ति को भी।

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तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम्।
तीसरा कृष्ण पिंगाक्ष – काले-पीले नेत्रों वाले। चौथा गजवक्त्र – हाथी के मुख वाले। इन नामों से उनकी दिव्य दृष्टि और विशाल स्वरूप की याद आती है।

लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च।
पांचवां लम्बोदर – बड़े पेट वाले। छठा विकट – भयंकर रूप वाले। बड़े पेट का अर्थ है कि वे सारी सृष्टि को अपने में समेटे हुए हैं।

सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्णं तथाष्टमम्।
सातवां विघ्नराज – विघ्नों के राजा। आठवां धूम्रवर्ण – धुएं जैसे रंग वाले। ये नाम उनकी बाधा निवारक शक्ति को दर्शाते हैं।

नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम्।
नौवां भालचंद्र – माथे पर चंद्रमा वाले। दसवां विनायक – विशेष रूप से पूजनीय।

एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम्।
ग्यारहवां गणपति – गणों के स्वामी। बारहवां गजानन – हाथी मुख वाले।

ये सभी नाम मिलकर गणेश जी के पूर्ण स्वरूप को दर्शाते हैं। आप जब इन नामों का स्मरण करते हैं, तो हर रूप में उनकी अलग शक्ति आपके जीवन में कार्य करती है।

अनुराधा पौडवाल संकट नाशन गणेश स्तोत्रम लिरिक्स

यहां पूरा स्तोत्र देवनागरी, रोमन ट्रांसलिटरेशन और सरल हिंदी अर्थ के साथ दिया गया है। आप अनुराधा पौडवाल की रिकॉर्डिंग के साथ आसानी से साथ-साथ गा या पढ़ सकते हैं।

॥ध्यानम्॥
प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् ।
भक्तावासं स्मरैनित्यमायु:कामार्थसिद्धये ॥
॥स्तोत्रम्॥
प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम् ।
तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ॥१॥

लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च ।
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्णं तथाष्टमम् ॥२॥

नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम् ।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तू गजाननम् ॥३॥

द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः ।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो ॥४॥

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥५॥

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जपेद्गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासैः फलं लभेत् ।
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशयः ॥६॥

अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत् ।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ॥७॥

संकट नाशन गणेश स्तोत्र का अर्थ और भाव

इस स्तोत्र का मूल भाव है – गणेश जी को बारह नामों से पुकारकर उनके समक्ष अपनी समस्याएं रखना। नारद जी कहते हैं कि जो व्यक्ति त्रिसंध्या (सुबह, दोपहर, शाम) में इन नामों का पाठ करता है, उसके सभी विघ्न दूर हो जाते हैं।

अर्थ सरल है। गणेश जी भक्तों के घर हैं। वे आयु बढ़ाते हैं, इच्छाएं पूरी करते हैं और धन देते हैं। विद्यार्थी को विद्या, धन चाहने वाले को धन, संतान की इच्छा रखने वाले को पुत्र और मोक्ष चाहने वाले को मुक्ति मिलती है।

आप जब भाव से पढ़ते हैं, तो हर शब्द आपके मन में गूंजता है। संकट आते हैं तो याद आता है – गजानन हैं, विघ्नराज हैं, वे हर बाधा को हटा देंगे।

संकट नाशन गणेश स्तोत्र पढ़ने के फायदे

नियमित पाठ से कई लाभ होते हैं। सबसे बड़ा फायदा यह कि जीवन की छोटी-बड़ी रुकावटें कम होने लगती हैं।

  • विद्यार्थियों को पढ़ाई में सफलता मिलती है।
  • व्यापार या नौकरी में तरक्की का रास्ता खुलता है।
  • परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
  • नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक वातावरण बनता है।

कई भक्त बताते हैं कि लगातार छह महीने तक पाठ करने पर मनोकामनाएं पूरी होने लगती हैं। एक साल नियमित करने पर तो सिद्धि जैसा अनुभव होता है। अनुराधा पौडवाल की आवाज में सुनने से एकाग्रता आसानी से बनी रहती है, खासकर उन लोगों के लिए जो व्यस्त जीवन जीते हैं।

इसे कैसे पढ़ें या सुनें?

सबसे अच्छा समय सुबह या संध्या का है। साफ मन और शरीर से पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। गणेश जी की मूर्ति या चित्र सामने रखें।

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अगर समय कम है तो अनुराधा पौडवाल की रिकॉर्डिंग सुन लें। रोजाना सुनने की आदत डालें। शुरुआत में १ या ३ बार से शुरू करें। श्रद्धा के साथ पढ़ने या सुनने से असर जल्दी दिखता है।

कुछ लोग इसे लिखकर ब्राह्मणों को समर्पित भी करते हैं, जिससे विद्या और ज्ञान में वृद्धि होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अनुराधा पौडवाल संकट नाशन गणेश स्तोत्रम लिरिक्स कहां मिलेंगे?

सटीक लिरिक्स ऊपर दिए गए हैं। आप उन्हें नोट करके इस्तेमाल कर सकते हैं।

इस स्तोत्र को कितनी बार पढ़ना चाहिए?

आदर्श रूप से त्रिसंध्या में एक-एक बार। व्यस्त लोगों के लिए रोजाना एक बार भी काफी फायदेमंद है।

पाठ करने से कब फायदा मिलता है?

कुछ लोगों को कुछ हफ्तों में राहत महसूस होती है, जबकि पूर्ण फल छह महीने से एक साल में मिलता है। धैर्य रखें।

क्या महिलाएं इसे पढ़ सकती हैं?

हां, बिल्कुल। यह स्तोत्र सभी के लिए है। कोई प्रतिबंध नहीं है।

अर्थ समझे बिना पढ़ने से भी लाभ होता है?

हां। श्रद्धा और सही उच्चारण मुख्य हैं। अर्थ समझने से भाव बढ़ता है, लेकिन बिना समझे भी नियमित पाठ का फल मिलता है।

अनुराधा पौडवाल वर्शन क्यों खास है?

उनकी आवाज में भक्ति और सरलता दोनों हैं, जिससे सुनते समय मन आसानी से लग जाता है।

समापन

जीवन के हर मोड़ पर जब संकट खड़े हों, तो गणेश जी को याद करें। अनुराधा पौडवाल संकट नाशन गणेश स्तोत्रम लिरिक्स आपके लिए एक आसान और शक्तिशाली उपाय है। आज से ही शुरू करें – चाहे पढ़कर या सुनकर।

धीरे-धीरे आप खुद महसूस करेंगे कि रास्ते साफ हो रहे हैं, मन हल्का हो रहा है और इच्छाएं पूरी हो रही हैं। गणेश जी हर विघ्न हरते हैं। बस श्रद्धा रखें और नियमित रहें।

आपका अनुभव क्या रहा है? कमेंट में जरूर बताएं। गणपति बप्पा मोरया! 🙏